जानें कब ! बड़े नोट बंद होने पर एक बार पहले भी मची थी अफरा तफरी ? जानें कब ! एक बार कालाधन रखने वालों ने सस्ते में बेचे बड़े नोट ?
जैसे ही भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को संबोधित करते हुए 500 और 1000 रूपए के नोट को बंद करने का बड़ा फैसला लिया तो कुछ लोगों में अफरा तफरी का माहौल बन गया, खासकर उनमें जिनके पास बड़ी मात्रा में काला धन की नकदी जमा कर रखी है।
लेकिन ऐसा फैसला देश में पहले भी हो चूका है। आइये जानें की पहले कब हुआ था ऐसा और कौन था उस समय देश का प्रधानमंत्री :-
सन् 1978 में लिया गया था ऐसा फैसला और उस समय जनता दल की सरकार थी और देश के प्रधानमंत्री थे मोरारजी देसाई ।
1978 में भी ऐसा फैसला उस समय के प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने लिया था जिसमे 100 रूपए से ऊपर वाले सभी नोट को बंद कर दिए थे। ऐसे ही इमरजेंसी के बाद मोरारजी देसाई ने 1000, 5000 और 10000 रूपए के नोटों पर रोक लगा दी थी।
उस समय भी कुछ लोगों में काफी अफरा तफरी वाला माहौल बन गया था।
जनता सरकार ने भी लोगों को पुराने नोट बदलने के लिए तय समय सीमा दी थी।
किस प्रकार के नोट हुए थे बंद :-
उस समय 1000, 5000 और 10000 रूपए के बड़े नोट हुआ करते थे और उनका इस्तेमाल बड़े व्यापार और लेनदेन में होता था।
कालाधन रखने वालों ने सस्ते में बेचे बड़े नोट
उस समय भी काफी लोगों ने बड़ी संख्या में काला धन अपने पास जमा कर रखा था लेकिन उनके लिए मुसीबत ये थी की वो धन बैंक में जमा कराने से वो मुसीबत में पड़ सकते थे ऐसे में उस समय में ऐसे लोगों ने अपने 1000 रूपए के नोट को सिर्फ 300-400 रूपए में बेचा था।
उस समय भी माँगा जाता था आय का विस्तृत ब्यौरा
उस समय भी बैंक में पुराने नोटों को जमा कराने से पहले फॉर्म भरवाया गया था और ज्यादा संख्या में नोट जमा कराने वाले लोगों के बारे में बैंक अधिकारी इनकम टैक्स अधिकारियों को उन लोगों के बारे में पूरी जानकारी देते थे। फिर इनकम टैक्स अधिकारियों द्वारा उन लोगों से उस रकम के बारे में जानकारी ली जाती थी की वो रकम कहाँ से आयी है। अगर कोई उस आमदनी के बारे में विस्तृत ब्यौरा नहीं दे पाता था तो उस पर 90 प्रतिशत तक का पेनल्टी के रूप में टैक्स वसूल जाता था।















