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★ मार्गशीर्ष मास के शुक्लपक्ष की एकादशी को मोक्षदा एकादशी कहा जाता है।
★ हर एकादशी व्रत का एक विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है।
★ एकादशी का व्रत करने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं।
★ मार्गशीर्ष मास के शुक्लपक्ष की एकादशी के दिन व्रत और गीता के ग्यारहवें अध्याय का पाठ करने वाले के पाप कट जाते हैं और व्यक्ति मोक्ष पाने का अधिकारी बना जाता है।
इस व्रत से होती है सुख- सौभाग्य में वृद्धि क्योंकि यह है सौभाग्य सुंदरी व्रत।
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सौभाग्य सुंदरी व्रत
•◆• इस व्रत के प्रभाव से अखंड सौभाग्यवती होने का आशिर्वाद प्राप्त होता है।
•◆• यह व्रत स्त्रियों के सौभाग्य में वृद्धि के साथ हर प्रकार के दांपत्य दोष, विवाह दोष तथा मंगली दोष को दूर करने वाला होता है।
•◆• इसी दिन साधना और तपस्या के फलस्वरूप माता सती को पति के रूप में भगवान शिव की प्राप्ति होती हैं।
•◆• जिन महिलाओं की कुण्डली में वैवाहिक सुख में कमी या विवाह के बाद दांपत्य जीवन में कमी और दांपत्य दोष जैसे अशुभ योग बन रहे हों, उन महिलाओं को यह व्रत विशेष रुप से करना चाहिए।
•◆• यह व्रत को गौरी तृतीया व्रत भी कहते हे।
स्कन्द षष्ठी
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चौथ माता जी का मंदिर कहाँ स्थित हैं ? करवा चौथ में किसकी पूजा की जाती हैं ? करवा चौथ कब आती हैं ? करवा चौथ का व्रत करने का समय ? करवा चौथ की पूजा किस तरह करें ?
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करवा चौथ
करवा चौथ कब आती हैं ?
करवा चौथ कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को आती है। इसे करक चतुर्थी भी कहते हैं।
करवा चौथ का व्रत ?
कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को करक चतुर्थी यानि करवा-चौथ का व्रत करने का विधान है।
करवा चौथ का व्रत कौन करते हैं ?
करवा चौथ का व्रत केवल सौभाग्यवती स्त्रियों ही करती है। यह व्रत वे सुहागिन स्त्रियाँ रखती हैं जो अपने पति के लिये आयु, स्वास्थ्य व सौभाग्य की कामना करती हैं।
करवा चौथ का व्रत करने का समय ?
जानें भगवान् कृष्ण की रास पूर्णिमा का राज ? इस दिन रात को चन्द्रमा की किरणों से अमृत झड़ता हैं ? इस दिन चन्द्रमा सोलह कलाओं से होता है परिपूर्ण ?
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शरद पूर्णिमा / कोजागर व्रत
शरद पूर्णिमा का महत्व
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पूरे साल में केवल इसी दिन चन्द्रमा सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है।
नवरात्र घटस्थापना क्यों करते हैं ?
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घटस्थापना क्यों करते हैं :-
नवरात्रि यानि नौ दिनों की समय अवधि में ब्रह्मांड में कार्यरत दैव्य शक्ति तत्त्वों का आवाहन कर उन्हें घट में स्थापित किया जाता हैं। जिससे पवित्रता, सुख-समृद्धि व वैभव की स्थापना होती हैं और कष्टकारी नकारात्मक दोषों को दूर किया जाता हैं।
घटस्थापना में घट का महत्व
घट या कलश के मुख में विष्णुजी का निवास माना जाता हैं। घट या कलश के कंठ में रुद्र नीलकंठ
अनंत चतुर्दशी Anant Chaturdashi
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अनंत चतुर्दशी Anant Chaturdashi
भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी के नाम से जाना जाता है।
इस दिन श्री हरि विष्णु की अनंत भगवान के रूप में पूजा होती है। भगवान श्री कृष्ण ने स्वयं बताया हैं की 'अनंत' उनके रूपों में से ही एक रूप है जो काल (समय) का प्रतीक है। इसे विप्पति से उभारने वाला व्रत कहा जाता हैं |
अनन्त-व्रत का महत्व
इस व्रत का विधिपूर्वक पालन करने से सारे पाप नष्ट होते हैं तथा सुख-शांति प्राप्त होती है। अपनी खोई हुई समृद्धि को पुन:प्राप्त किया जा सकता हैं। भगवान श्री हरि विष्णु व्रत करने वाले पर प्रसन्न हाेकर उसे सुख, संपदा, धन-धान्य, यश-वैभव, लक्ष्मी, पुत्र आदि सभी प्रकार के सुख प्रदान करते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्रत करने वाला व्रती यदि विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्रम् का पाठ भी करे, तो उसकी वांछित मनोकामना की पूर्ति जरूर होती है। पांडवो ने अपने वनवास में इस व्रत का पालन किया था जिसके बाद उनकी विजय हुई थी। इस व्रत का पालन राजा हरिशचन्द्र ने भी किया था और अनंत भगवान के प्रसन्न होने से उन्हें भी अपना राज पाठ वापस मिला था |
अनंत चतुर्दशी इसलिये भी खास होती हैं क्योंकि
वामन जयंती Vaman Jayanti
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वामन जयंती Vaman Jayanti
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी को वामन जयंती मनाई जाती है। द्वादशी तिथि होने के कारण इसे 'वामन द्वादशी' भी कहा जाता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार द्वादशी तिथि को श्रवण नक्षत्र के अभिजित मुहूर्त में भगवान श्रीविष्णु ने जनकल्याण के लिए वामन अवतार लिया था।
वामन अवतार की कथा Vaman avtar ki Katha
जलझूलनी एकादशी Jaljhualni Ekadashi
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जलझूलनी एकादशी Jaljhualni Ekadashi

हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को जलझूलनी एकादशी कहते हैं। इस दिन भगवान वामन की पूजा की जाती है।
मान्यता हैं की इस दिन भगवान करवट लेते हैं, इसलिए इसको परिवर्तिनी एकादशी भी कहते हैं। इस एकादशी के दिन व्रत करने से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है।
यह मान्यता हैं की जो मनुष्य इस एकादशी को भगवान विष्णु के वामन रूप की पूजा करता है, उसे तीनों लोको के पूजा का फल मिलता हैं।

हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को जलझूलनी एकादशी कहते हैं। इस दिन भगवान वामन की पूजा की जाती है।
मान्यता हैं की इस दिन भगवान करवट लेते हैं, इसलिए इसको परिवर्तिनी एकादशी भी कहते हैं। इस एकादशी के दिन व्रत करने से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है।
यह मान्यता हैं की जो मनुष्य इस एकादशी को भगवान विष्णु के वामन रूप की पूजा करता है, उसे तीनों लोको के पूजा का फल मिलता हैं।
दाधीच जंयती Dadhich jayanti
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दाधीच जंयती
प्रतिवर्ष भाद्रपद माह की शुक्ल अष्टमी को दाधीच जंयती मनाई जाती है। यूँ तो इतिहास में कई दानी हुए हैं, किंतु मानव कल्याण के लिए अपनी अस्थियों का दान करने वाले मात्र महर्षि दधीचि ही थे।
दाधीच का परिचय
दधीचि प्राचीन काल के परम तपस्वी और ख्यातिप्राप्त महर्षि थे। महर्षि दधीची
ऋषी पंचमी Rishi Panchami
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ऋषी पंचमी Rishi Panchami
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को ऋषी पंचमी का त्यौहार मनाया जाता हैं। इस दिन महिलाये व्रत करती हैं और ऋषियों की पूजा करने के बाद ऋषी पंचमी की कहानी सुनी जाती है।
इस दिन बहन अपने भाइयो की सुख व लम्बी उम्र की कामना के लिए व्रत व् पूजा करती हैं । कई जगह रिवाज के अनुसार बहन भैया को राखी भी बाँधती है।
इस दिन गंगा स्नान करने
हरतालिका तीज Hartalika Teej
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हरतालिका तीज Hartalika teej
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज के नाम से जाना जाता हैं।
हरतालिका तीज का महत्व Hartalika teej ka mahtav
इस तीज पर मान्यता है कि इस दिन जो महिलाएं विधि-विधानपूर्वक और पूर्ण निष्ठा से इस व्रत को करती हैं, वो अपने मन के अनुरूप पति को
वाराह अवतार Varah avtaar
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वाराह अवतार Varah avtaar
वाराह अवतार भगवान श्रीहरि विष्णु का ही उनके लिए गए दस अवतारों में से एक अवतार रूप है।
वाराह जयंती varah jyanti
भाद्रपद माह में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को वाराह जयंती मनाई जाती हैं।
वाराह अवतार की कथा varah avtaar ki katha
प्राचीन काल में एक बार पूरी पुथ्वी हिल उठी थी क्योंकि एक साथ दो राक्षसों ने दिति के गर्भ
त्योहार :- गोगानवमी goganavmi
Author: Budha ram |
व्रत त्यौहार :- कृष्ण जन्माष्टमी krishna janmashtami
Author: Budha ram |
कृष्ण जन्माष्टमी krishna janmashtami
भगवान श्रीकृष्ण इस दिन पृथ्वी पर अवतरित हुए थे, इसीलिए इस दिन को कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाते हैं। भगवान श्रीकृष्ण का जनम भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मध्यरात्रि को हुआ था। भगवान श्रीकृष्ण ने कंस का विनाश करने के लिए मथुरा में जन्म लिया था। इसीलिए श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर मथुरा नगरी भक्ति के रंगों से सराबोर हो उठती है। कृष्ण जन्मभूमि के अलावा द्वारकाधीश , बिहारीजी एवं अन्य सभी मन्दिरों में भव्य आयोजन होता है, जिनमें भारी भीड़ होती है।
कैसे मनाते हैं :-
जन्माष्टमी के अवसर परव्रत त्यौहार :- हल षष्ठी Hal shashti
Author: Budha ram |
हलषष्ठी, ललही छठ Hal shashti
यह व्रत भाद्रपद कृष्ण पक्ष षष्ठी को किया जाता है। इस दिन हल धारी श्री बलराम जी का जन्म हुआ था। कुछ लोग जनक नंदिनी माता सीता का भी जन्म दिवस इस तिथि को मानते हैं, बलराम जी के मुख्य शस्त्रों में हल और मूसल उल्लेखनीय है। इसी से इनका एक नाम हलधर भी है, इन्हीं के नाम के आधार पर इसका नाम हलषष्ठी पड़ा हैं।
हलषष्ठी व्रत Hal shashti vart
यह व्रत पुत्रवती स्त्रियाँ रखती हैं। जो स्त्रियाँ व्रत रखती हैं। वह हल से जोता और बोया गया भोजन
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