मोक्षदा एकादशी विशेष ~ गीता जयंती
मोक्षदा एकादशी
★ मार्गशीर्ष मास के शुक्लपक्ष की एकादशी को मोक्षदा एकादशी कहा जाता है।
★ हर एकादशी व्रत का एक विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है।
★ एकादशी का व्रत करने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं।
★ मार्गशीर्ष मास के शुक्लपक्ष की एकादशी के दिन व्रत और गीता के ग्यारहवें अध्याय का पाठ करने वाले के पाप कट जाते हैं और व्यक्ति मोक्ष पाने का अधिकारी बना जाता है।
इसलिए इस एकादशी को मोक्षदा एकादशी भी कहा जाता है।
इसलिए इस एकादशी को मोक्षदा एकादशी भी कहा जाता है।
मोक्षदा एकादशी का इतिहास
मोक्षदा एकादशी के दिन ही कुरुक्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का उपदेश दिया था। इसलिए इस दिन को गीता जयंती के नाम से जाना जाता है। गीता-पाठ का प्रारंभ मोक्षदा एकादशी के दिन से ही किया जाता है। गीता के ज्ञान के प्रकाश से अज्ञान रूपी अंधकार नष्ट हो जाता है।
गीता का अठारवां अध्याय मोक्ष संयास योग के नाम से जाना जाता है। जो व्यक्ति समय के अभाव में यदि संपूर्ण गीता का पाठ नहीं कर पाता हैं वह केवल अठारवें अध्याय का पाठ करें तो उन्हें संपूर्ण गीता पाठ का लाभ मिल जाता है।

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