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वसंत पंचमी

वसंत पंचमी

  


 माघ के महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी को वसंत पंचमी का त्योहार मनाया जाता है।

वसंत पंचमी का महत्व :-

बसंत ऋतु का प्रारम्भ ~
      बसंत पंचमी के दिन से ही 'बसंत ऋतु' प्रारम्भ होती है। वसंत ऋतू को सभी ऋतुओं का राजा माना गया है यानि सभी ऋतुओं में से यह ऋतू सर्वश्रेष्ठ होती है। इस ऋतू में पंचतत्त्व जल, वायु, धरती, आकाश और अग्नि ये सभी सुहावने रूप में मनमोहक होते हैं। वसंत ऋतु के समय प्रकृति का कण-कण खिल उठता है। 

      इस ऋतु में फूलों पर बहार आ जाती है, खेतों मे सरसों का सोना चमकने लगता है, जौ और गेहूँ की बालियाँ खिलने लगतीं है, आमों के पेड़ों पर बौर आ जाता है और हर तरफ़ रंग-बिरंगी तितलियाँ मँडराने लगतीं है।

देवी सरस्वती की पूजा ~
      इस दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। बसंत पंचमी को देवी माँ सरस्वती का जन्म दिवस माना जाता है। इसलिए इसको वागीश्वरी जयंती व श्रीपंचमी नाम से भी जाना जाता है। यह त्योहार पुरे भारत में मनाया जाता है। इस दिन शिक्षण संस्थानों व विद्यालयों में ज्ञान की देवी सरस्वती की पूजा कि जाती है।


अत्यंत शुभ मुहूर्त ~
       वसंत पंचमी को सभी शुभ कार्यों के लिए अत्यंत शुभ मुहूर्त माना गया है। मुख्यतः विद्यारंभ, नवीन विद्या प्राप्ति एवं गृह प्रवेश के लिए बसंत पंचमी के दिन को वेदों और पुराणों में भी अत्यंत शुभ माना है।


कामदेव की ऋतू ~
       वसंत ऋतु को प्रेम की ऋतु माना जाता है। यह ऋतु कामदेव की ऋतु है। यौवन इस ऋतू में अंगड़ाई लेता है। दरअसल वसंत ऋतु एक भाव है जो प्रेम में समाहित हो जाता है। वसंत कामदेव का मित्र होता है और कामदेव का धनुष फूलों का बना हुआ है। जब कामदेव अपनी कमान से तीर छोड़ते हैं तो उसकी कोई आवाज नहीं आती है। कामदेव के बाणों से बचने का कोई कवच नहीं है। इसलिए कामदेव का एक नाम 'मार' है।


कितने वर्ष बाद बदल जाती है मकर संक्रांति की तारीख ? जानें क्यों और कैसे ?

जानें क्यों और कैसे में आज मकर सक्रांति पर विशेष जानकारी के~

   लगभग 1000 वर्ष पूर्व में मकर संक्रांति दिसम्बर माह में मनाई जाती थी। इस समय यह जनवरी माह में मनाई जाती है। इसी क्रम में यह अनुमान लगाया जा रहा है कि 5000 साल बाद मकर संक्रांति फ़रवरी महीने के अंत में मनाई जाएगी। क्या आप जानते है इसका क्या कारण है यदि नहीं तो पढ़े इस पोस्ट में 

makar skaranti मकर सक्रांति

मकर संक्रांति का ज्योतिषय आंकलन :-

लोहड़ी का त्यौहार

लोहड़ी



⏩ लोहड़ी उत्तर भारत का एक प्रसिद्ध त्योहार है।
⏩ खासकर लोहड़ी का त्यौहार पंजाब तथा हरियाणा के लोगो द्वारा मनाया जाता है। 
⏩ हर वर्ष पौष माह के अंतिम दिन, सूर्यास्त के बाद यानि मकर संक्रांति से एक दिन पहले आने वाली रात को लोहड़ी का पर्व मनाया जाता है।
⏩ लोहड़ी से कुछ दिन पहले से ही बालक और बालिकाएँ 'लोहड़ी' के लोकगीत गाकर लकड़ी और उपले इकट्ठे करते हैं।
⏩ इस एकत्रित सामग्री से चौराहे या मुहल्ले के किसी खुले स्थान पर अग्नि जलाई जाती है।

कैसे मिलेगा सुख और सौभाग्य इस लाभ पंचमी को ? लाभ पंचमी को किसका और कैसे करें आह्वान के साथ पूजन ? लाभ पंचमी पर खास जानकारी जाने इस पोस्ट में

दीपावली विशेष

सौभाग्य पंचमी Saubhagya Panchami

   कार्तिक शुक्ल पक्ष कि पंचमी जो सौभाग्य (लाभ) पंचमी कहलाती है वो आपके जीवन में करेंगी सुख और सौभाग्य की अपार वृद्धि।




    लाभ पंचमी के दिन को कारोबार में तरक्की और शुरुआत के लिए बहुत ही शुभ दिन माना जाता है।

अन्नकूट और गोवर्धन पूजा

दीपावली विशेष

अन्नकूट या गोवर्धन पूजा कब की जाती है ?

   गोवर्धन पूजा/अन्नकूट कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को मनाया जाता है।

अन्नकूट या गोवर्धन पूजा की प्रथा कब से है ?

      अन्नकूट या गोवर्धन पूजा की प्रथा भगवान कृष्ण के अवतार के समय द्वापर युग से प्रारम्भ हुई थी।

गोवर्धन पूजा की कथा -

    

दीपावली का दिन क्यों होता है विशेष ? जानें दीपावली का इतिहास इस वेब पोस्ट में - दीपावली विशेष

जानें दीपावली के दिन का इतिहास -



   • कहा जाता है कि इस दिन जब

छोटी दीपावली, नरक चौदस, रूप चौदस, रूप चतुर्दशी, नर्क चतुर्दशी, नरका पूजा विशेष

'छोटी दीपावली' कब होती हैं ?
नरक चतुर्दशी को रूप चतुर्दशी भी क्यों कहते हैं ?

नरक चतुर्दशी कब मनाई जाती हैं ?

     नरक चतुर्दशी कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है।

    इस चतुर्दशी का पूजन कर अकाल मृत्यु से मुक्ति तथा स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए यमराज जी की पूजा व उपासना की जाती है।
    ऐसी कहानी है कि इस दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध किया था। इसी कारण इसे नरक चतुर्दशी कहा जाता हैं।
   इसके अतिरिक्त इस चतुर्दशी को 'नरक चौदस', 'रूप चौदस', 'रूप चतुर्दशी', 'नर्क चतुर्दशी' या 'नरका पूजा' के नाम से भी जाना जाता है।

छोटी दीपावली



   दीपावली के पाँच दिन के पर्व के दूसरे दिन और दीपावली से एक दिन पहले मनाये जाने के कारण इसे छोटी दीपावली कहते हैं। इस दिन भी घरों में और प्रवेश द्वारों पर दीपक लगाये जाते हैं। धूमधाम के साथ घर के सभी सदस्यों द्वारा मिलकर यह त्यौहार मनाया जाता हैं।
  

रूप चौदस


   एक कथा के अनुसार एक ऋषि के बदन में कीड़े पड़ जाते है तब वे नारद मुनि से इसका उपाय पूछते है कि 'उनका रूप कैसे सही हो सकता है ?' तो नारद मुनि ने उनसे कहा कि ''कार्तिक मास कृष्ण पक्ष चतुर्दशी के दिन शरीर पर चंदन लेप लगा कर सूर्योदय से पूर्व स्नान करे और भगवान श्री कृष्ण की पूजा करें। इससे आपको आपका सौन्दर्य पुनः प्राप्त होगा।'' ऋषि ने वही किया जैसा नारद मुनि ने कहा था और उन्होंने अपने शरीर को स्वस्थ कर उसका रूप पुनः पहले जैसा कर लिया। तब से इस दिन को रूप चौदस के रूप में भी मनाने की परंपरा है।

धनतेरस के दिन जानें भगवान धन्वंतरी‍ के बारे में और भगवान धन्वन्तरि का पूजन क्यों किया जाता हैं ?

धनतेरस, धन्वन्तरि जयन्ती, धन्वन्तरि त्रयोदशी विशेष

 

  भगवान धन्वन्तरि, जो कि आयुर्वेद के देवता हैं, उनका जन्म कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन ही हुआ था।

भगवान धन्वन्तरि कौन थे ?

    भगवान धन्वन्तरि को आयुर्वेद का जनक माना जाता हैं।

कैसे करें धनतेरस के दिन भगवान् कुबेर की पूजा ?

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   धनतेरस के साथ ही पाँच दिनों के दीपोत्सव पर्व की शुरुआत होती है।

    इस दिन भगवान् कुबेर का पूजन किया जाता हैं।

जानें कैसे करें धनतेरस के दिन भगवान् कुबेर की पूजा 


 कुबेर पूजन :-

शुभ मुहूर्त में अपने व्यावसायिक प्रतिष्ठान में नई गादी बिछाएं अथवा

विशेष लाभ प्राप्त करने के लिए धनतेरस के दिन क्या करें ?

धनतेरस, धन्वन्तरि जयन्ती, धन्वन्तरि त्रयोदशी विशेष



   ◆ धनतेरस के दिन भगवान् कुबेर का पूजन करें।

   ◆ दीर्घ आयु और स्वस्थ स्वास्थ्य की कामना के लिए धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरी‍ का पूजन करें।

   ◆ यमराज की पूजा करें और यम दीपदान करें।

   ◆ धनतेरस के उपलक्ष्य में अपने सामर्थ्य के अनुसार बाज़ारों से नए बर्तन, वस्त्र, दीपावली पूजन हेतु लक्ष्मी-गणेश सिक्के, सोने-चांदी के आभूषण, खिलौने, खील-बताशे, आदि की ख़रीददारी करें।

    ◆ इस दिन नवीन झाडू एवं सूपड़ा खरीदकर उनका पूजन करें।

    ◆ इस दिन से किसी के साथ उधार में लेन देन नहीं करें।

वर्ष में एक बार की जाती हैं यमराज की पूजा पूजा, कब, कैसे और क्यों ? यम पाश से मिलेगी मुक्ति करें यम दीपदान। जानें यम दीपदान के बारे में --

धनतेरस, धन्वन्तरि जयन्ती, धन्वन्तरि त्रयोदशी विशेष

dhanteras यम दीपदान कैसे करें

    मृत्यु के देवता यमराज की वर्षभर में सिर्फ एक बार की जाने वाली पूजा धनतेरस के दिन की जाती हैं।

     इस दिन घर के बाहर यम दीपक जलाया जाता है जिससे यमराज प्रसन्न होते हैं और उनके आशीर्वाद से परिवार के किसी भी सदस्य की असामयिक मृत्यु नहीं होती हैं।

यम दीपदान कैसे करें :-

गणेश चतुर्थी Ganesh chaturthi

गणेश चतुर्थी


   भगवान श्री गणेशजी के व्रत तो भाद्रपद-कृष्ण-चतुर्थी से प्रारंभ करके प्रत्येक मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी के दिन किया जाता हैं जिससे विघ्नेश्वरगणेश प्रसन्न होकर भक्तो के समस्त विघ्न और संकट दूर कर देते हैं। परंतु धार्मिक मान्यता हैं की भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मध्याह्न के समय भगवान श्री गणेशजी का जन्म हुआ था  इस कारण गणेश चतुर्थी का पर्व भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता हैं। खासकर यह त्योहार महाराष्ट्र में बडी़ धूमधाम से मनाया जाता हैं।

Ganesh chaturthi गणेश चतुर्थी

गणेश चतुर्थी की कथा :-
Ganesh chaturthi ki katha :-

 
     एक बार भगवान शंकर स्नान करने के लिए कैलाश पर्वत

व्रत त्यौहार :- कृष्ण जन्माष्टमी krishna janmashtami

कृष्ण जन्माष्टमी krishna janmashtami




          भगवान श्रीकृष्ण इस दिन पृथ्वी पर अवतरित हुए थे, इसीलिए इस दिन को कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाते हैं। भगवान श्रीकृष्ण का जनम भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मध्यरात्रि को हुआ था। भगवान श्रीकृष्ण ने कंस का विनाश करने के लिए मथुरा में  जन्म लिया था। इसीलिए श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर मथुरा नगरी भक्ति के रंगों से सराबोर हो उठती है। कृष्ण जन्मभूमि के अलावा द्वारकाधीश , बिहारीजी एवं अन्य सभी मन्दिरों में भव्य आयोजन होता है, जिनमें भारी भीड़ होती है।


कैसे मनाते हैं  :-

      जन्माष्टमी के अवसर पर

त्यौहार :- रक्षाबंधन (राखी) rakshabandhan

रक्षाबंधन (राखी)



       रक्षाबंधन का त्यौहार श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। श्रावण (सावन) में मनाये जाने के कारण इसे श्रावणी (सावनी) या सलूनो भी कहते हैं। रक्षाबन्धन त्यौहार में राखी या रक्षासूत्र का सबसे अधिक महत्त्व है। राखी कच्चे सूत जैसे सस्ती वस्तु से लेकर रंगीन कलावे, रेशमी धागे, तथा सोने या चाँदी जैसी मँहगी

त्यौहार जयंती :- हयग्रीव जयंती

हयग्रीव जयंती 


हयग्रीव देवता को श्री विष्णु का अवतार\माना जाता है। इस अवतार में उनका शीश अश्व का है और यह अवतार

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