त्यौहार जयंती :- हयग्रीव जयंती
हयग्रीव जयंती
हयग्रीव देवता को श्री विष्णु का अवतार\माना जाता है। इस अवतार में उनका शीश अश्व का है और यह अवतार
उनके दशावतारों का भाग नहीं है। इस मंदिर में श्री विष्णु योग निद्रा की स्थिति में है और इसीलिए उनके साथ उनकी सहचरी महालक्ष्मी नहीं है।
यह भगवान ज्ञान और विद्या के देवता है। भक्त किताबे, पेन इत्यादि की पूजा करते है और अनेको दीप जलाते है।
चेट्टिपुण्यम हयग्रीव मंदिर
ज्ञान के देवता का यह मंदिर चेंगलपेट के पास स्थित हैं। यह माना जाता है की तिरुवाहिन्दूपुरम के मंदिरो के विग्रह आक्रमण से बचने के लिए यहाँ लाये गए। स्थानीय लोग इस मंदिर को श्री वरदराज स्वंय मंदिर भी कहते है। यह मंदिर करीब ४०० साल पुराना है। देव वरदराज का भी आसन यहाँ मौजूद है। उनके साथ उनकी दो सहचरियां श्रीदेवी और भूदेवी है। एक स्थान देवी हेमाम्बुजा नयकी के लिए भी है। यह मुख्य द्वार के पास ही है।
इसीलिए इस मंदिर के नाम को तीनो देवताओ के नाम से जाना जाता है। मूलवर - वरदराजस्वामी , उत्सव मूर्ती देवनाथस्वामी और मुख्य देवता योग हयग्रीव
यह मंदिर चेन्नई से २० किलोमीटर की दुरी पर चेंगलपेट की ओर स्थित हैं। यहाँ जाने के लिए बस के अलावा ऑटो की सुविधाये भी है।
