छोटी दीपावली, नरक चौदस, रूप चौदस, रूप चतुर्दशी, नर्क चतुर्दशी, नरका पूजा विशेष
'छोटी दीपावली' कब होती हैं ?
नरक चतुर्दशी को रूप चतुर्दशी भी क्यों कहते हैं ?
नरक चतुर्दशी कब मनाई जाती हैं ?
नरक चतुर्दशी कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है।
इस चतुर्दशी का पूजन कर अकाल मृत्यु से मुक्ति तथा स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए यमराज जी की पूजा व उपासना की जाती है।
ऐसी कहानी है कि इस दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध किया था। इसी कारण इसे नरक चतुर्दशी कहा जाता हैं।
इसके अतिरिक्त इस चतुर्दशी को 'नरक चौदस', 'रूप चौदस', 'रूप चतुर्दशी', 'नर्क चतुर्दशी' या 'नरका पूजा' के नाम से भी जाना जाता है।
छोटी दीपावली
दीपावली के पाँच दिन के पर्व के दूसरे दिन और दीपावली से एक दिन पहले मनाये जाने के कारण इसे छोटी दीपावली कहते हैं। इस दिन भी घरों में और प्रवेश द्वारों पर दीपक लगाये जाते हैं। धूमधाम के साथ घर के सभी सदस्यों द्वारा मिलकर यह त्यौहार मनाया जाता हैं।
रूप चौदस
एक कथा के अनुसार एक ऋषि के बदन में कीड़े पड़ जाते है तब वे नारद मुनि से इसका उपाय पूछते है कि 'उनका रूप कैसे सही हो सकता है ?' तो नारद मुनि ने उनसे कहा कि ''कार्तिक मास कृष्ण पक्ष चतुर्दशी के दिन शरीर पर चंदन लेप लगा कर सूर्योदय से पूर्व स्नान करे और भगवान श्री कृष्ण की पूजा करें। इससे आपको आपका सौन्दर्य पुनः प्राप्त होगा।'' ऋषि ने वही किया जैसा नारद मुनि ने कहा था और उन्होंने अपने शरीर को स्वस्थ कर उसका रूप पुनः पहले जैसा कर लिया। तब से इस दिन को रूप चौदस के रूप में भी मनाने की परंपरा है।



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