कितने वर्ष बाद बदल जाती है मकर संक्रांति की तारीख ? जानें क्यों और कैसे ?
जानें क्यों और कैसे में आज मकर सक्रांति पर विशेष जानकारी के~
लगभग 1000 वर्ष पूर्व में मकर संक्रांति दिसम्बर माह में मनाई जाती थी। इस समय यह जनवरी माह में मनाई जाती है। इसी क्रम में यह अनुमान लगाया जा रहा है कि 5000 साल बाद मकर संक्रांति फ़रवरी महीने के अंत में मनाई जाएगी। क्या आप जानते है इसका क्या कारण है यदि नहीं तो पढ़े इस पोस्ट में
मकर संक्रांति का ज्योतिषय आंकलन :-
➡ सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में जाना 'संक्रान्ति' का कहलाता है। जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है तो उस 'संक्रान्ति' को 'मकर संक्रांति' कहा जाता है।
मकर संक्रांति की ज्योतिष गणित
हर साल सूर्य धनु राशि से मकर राशि में 20 मिनट की देरी से प्रवेश करता है। इस तरह हर तीन साल के बाद सूर्य एक घंटे बाद मकर राशि में प्रवेश करता है। इसी तरह से हर 72 साल बाद में सूर्य एक दिन की देरी से मकर राशि में प्रवेश करता है। इस तरह हर 2160 साल के बाद जो 'मकर संक्रांति' आती है वो 1 माह की देरी के बाद के पड़ती है।
खगोलीय गणना में मकर संक्रांति का इतिहास :-
◆ राजा हर्षवर्द्धन के समय में मकर संक्रांति 24 दिसम्बर को होती थी।
◆ मुग़ल बादशाह अकबर के शासन काल में मकर संक्रांति 10 जनवरी को होती थी।
◆ शिवाजी के जीवन काल में यह पर्व 11 जनवरी को पड़ता था।


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