कविता क्या कसूर है मेरा
कविता क्या कसूर है मेरा
क्या कसूर है मेरा ,
क्या कसूर है मेरा ,
है भगवान मुझे बता दे
क्या कसूर है मेरा !!
कोई मुझे भ्रूण में मारता ,
कोई मारता धरती पर ,
मिलती हूँ ज्यादातर मैं
किसी रेल की
ही पटरी पर !
सुन के मेरे दिल का दर्द ,
पिघलता नहीं क्या दिल तेरा !
क्या कसूर है मेरा ,
है भगवान ! क्या कसूर है मेरा !!
क्यों भेजता है मुझे वहां ,
जहाँ जरूरत ही नहीं मेरी ,
जहाँ भ्रूण से जीवित नहीं ,
लाश निकलती है मेरी !
पहुँच भी जाऊँ अगर वहाँ
तो काल को दे देते है अर्पण मेरा !!
क्या कसूर है मेरा ,
है भगवान ! क्या कसूर है मेरा !!
छोड़ गयी क्यों माँ मुझको ,
उस सुनसान से पालने पर ,
तस्वीर तो दी होती पड़ने ,
इन नन्हीं सी आँखों पर !
देखने की इच्छा है बस ,
एक बार वो चेहरा तेरा !
क्या कसूर है मेरा ,है माँ !
क्या कसूर है मेरा !!
मेरी दास्तान तो बड़ी अजीब है ,
शिशुगृह ही मेरा नसीब है ,
मुझको भी तो जीने दो ,
आग्रह यही है मेरा !
क्या कसूर है मेरा ,
हे जग ! क्या कसूर है मेरा !!
क्या कसूर है मेरा ,
क्या कसूर है मेरा ,
है भगवान मुझे बता दे
क्या कसूर है मेरा !!
कोई मुझे भ्रूण में मारता ,
कोई मारता धरती पर ,
मिलती हूँ ज्यादातर मैं
किसी रेल की
ही पटरी पर !
सुन के मेरे दिल का दर्द ,
पिघलता नहीं क्या दिल तेरा !
क्या कसूर है मेरा ,
है भगवान ! क्या कसूर है मेरा !!
क्यों भेजता है मुझे वहां ,
जहाँ जरूरत ही नहीं मेरी ,
जहाँ भ्रूण से जीवित नहीं ,
लाश निकलती है मेरी !
पहुँच भी जाऊँ अगर वहाँ
तो काल को दे देते है अर्पण मेरा !!
क्या कसूर है मेरा ,
है भगवान ! क्या कसूर है मेरा !!
छोड़ गयी क्यों माँ मुझको ,
उस सुनसान से पालने पर ,
तस्वीर तो दी होती पड़ने ,
इन नन्हीं सी आँखों पर !
देखने की इच्छा है बस ,
एक बार वो चेहरा तेरा !
क्या कसूर है मेरा ,है माँ !
क्या कसूर है मेरा !!
मेरी दास्तान तो बड़ी अजीब है ,
शिशुगृह ही मेरा नसीब है ,
मुझको भी तो जीने दो ,
आग्रह यही है मेरा !
क्या कसूर है मेरा ,
हे जग ! क्या कसूर है मेरा !!