विश्व जनसंख्या दिवस ( World Population Day)
विश्व जनसंख्या दिवस ( World Population Day)
प्रत्येक वर्ष 11 जुलाई को मनाया जाता है। विश्व में अत्यधिक तेज़ गति से बढ़ती जनसंख्या के प्रति लोगों में जागरूकता लाने के उद्देश्य से ही यह दिवस मनाया जाता है।
विश्व जनसंख्या दिवस की शुरुआत
11 जुलाई, 1987 में
विश्व की जनसंख्या 5 अरब को पार कर गई थी। तब संयुक्त राष्ट्र ने जनसंख्या वृद्धि को लेकर दुनिया भर में जागरूकता फैलाने के लिए 'विश्व जनसंख्या दिवस' मनाने का निर्णय लिया था।
भारत की जनसंख्या की स्थिति
सम्पूर्ण विश्व में चीन को जनसंख्या के क्षेत्र में विश्व में प्रथम स्थान हासिल है। वहीं दूसरी ओर भारत भी लगभग सवा अरब जनसंख्या के साथ विश्व में दूसरे नंबर पर है। विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि अगर भारत की जनसंख्या इसी दर से बढ़ती रही तो 2030 तक उसे विश्व में प्रथम स्थान हासिल हो जायेगा। भारत विश्व में धनी आबादी वाला दूसरा देश है, यहां विश्व की कुल जनसंख्या की 16.7 प्रतिशत जनसंख्या रहती है। भारत के राज्यों की जनसंख्या की तुलना कई देशों की जनसंख्या से की जा सकती है।
कुछ तथ्यः
भारत की जनसंख्या का 51 प्रतिशत भाग जनन आयु वर्ग का है।
वर्ष 2016 तक 1570 लाख व्यक्ति अतिरिक्त बढ़ जाएंगे।
प्रति परिवार दो बच्चों के बाद जन्म लेने वाले बच्चों के कारण ही जनसंख्या में लगभग 42 प्रतिशत वृद्धि होगी।
1880 लाख दंपत्ती या युवक-युवतियों को गर्भनिरोधक की आवश्यकता है।
जनंसख्या व्रद्धि के कारण
निर्धनता, अंधविश्वास, अशिक्षा, धार्मिक विश्वास, भ्रामक धारणाएँ और स्वास्थ्य के प्रति अवैधानिक दृष्टिकोण जनसंख्या वृद्धि के कारण हैं ।
जनसंख्या वृद्धि के दुष्परिणाम
बढ़ती गरीबी,बेरोजगारी,अशिक्षा ये सभी जनसंख्या वृद्धि का परिणाम है।
जनसंख्या वृद्धि को रोकने के उपाय
शिक्षा एवं ज्ञान को बढ़ा कर जागरुकता लाने से वृद्धि दर कम की जा सकती हे।
परिवार नियोजन के कार्यक्रम को बढ़ावा देना होगा।
हम अपने समाज, परिवार और राष्ट्र को सुखी, समृद्ध तथा उन्नत बनाना चाहते है तो परिवार कल्याण योजनाओं को घर-घर पहुँचाना होगा । उन्हें उनकी समुद्धि के लिए परिवार की वैज्ञानिक व्यवस्था के उपाय सुझाने होंगे । इसी में हम सबका कल्याण निहित है ।
प्रत्येक वर्ष 11 जुलाई को मनाया जाता है। विश्व में अत्यधिक तेज़ गति से बढ़ती जनसंख्या के प्रति लोगों में जागरूकता लाने के उद्देश्य से ही यह दिवस मनाया जाता है।
विश्व जनसंख्या दिवस की शुरुआत
11 जुलाई, 1987 में
विश्व की जनसंख्या 5 अरब को पार कर गई थी। तब संयुक्त राष्ट्र ने जनसंख्या वृद्धि को लेकर दुनिया भर में जागरूकता फैलाने के लिए 'विश्व जनसंख्या दिवस' मनाने का निर्णय लिया था।
भारत की जनसंख्या की स्थिति
सम्पूर्ण विश्व में चीन को जनसंख्या के क्षेत्र में विश्व में प्रथम स्थान हासिल है। वहीं दूसरी ओर भारत भी लगभग सवा अरब जनसंख्या के साथ विश्व में दूसरे नंबर पर है। विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि अगर भारत की जनसंख्या इसी दर से बढ़ती रही तो 2030 तक उसे विश्व में प्रथम स्थान हासिल हो जायेगा। भारत विश्व में धनी आबादी वाला दूसरा देश है, यहां विश्व की कुल जनसंख्या की 16.7 प्रतिशत जनसंख्या रहती है। भारत के राज्यों की जनसंख्या की तुलना कई देशों की जनसंख्या से की जा सकती है।
कुछ तथ्यः
भारत की जनसंख्या का 51 प्रतिशत भाग जनन आयु वर्ग का है।
वर्ष 2016 तक 1570 लाख व्यक्ति अतिरिक्त बढ़ जाएंगे।
प्रति परिवार दो बच्चों के बाद जन्म लेने वाले बच्चों के कारण ही जनसंख्या में लगभग 42 प्रतिशत वृद्धि होगी।
1880 लाख दंपत्ती या युवक-युवतियों को गर्भनिरोधक की आवश्यकता है।
जनंसख्या व्रद्धि के कारण
निर्धनता, अंधविश्वास, अशिक्षा, धार्मिक विश्वास, भ्रामक धारणाएँ और स्वास्थ्य के प्रति अवैधानिक दृष्टिकोण जनसंख्या वृद्धि के कारण हैं ।
जनसंख्या वृद्धि के दुष्परिणाम
बढ़ती गरीबी,बेरोजगारी,अशिक्षा ये सभी जनसंख्या वृद्धि का परिणाम है।
जनसंख्या वृद्धि को रोकने के उपाय
शिक्षा एवं ज्ञान को बढ़ा कर जागरुकता लाने से वृद्धि दर कम की जा सकती हे।
परिवार नियोजन के कार्यक्रम को बढ़ावा देना होगा।
हम अपने समाज, परिवार और राष्ट्र को सुखी, समृद्ध तथा उन्नत बनाना चाहते है तो परिवार कल्याण योजनाओं को घर-घर पहुँचाना होगा । उन्हें उनकी समुद्धि के लिए परिवार की वैज्ञानिक व्यवस्था के उपाय सुझाने होंगे । इसी में हम सबका कल्याण निहित है ।
