हिंदी भाषा में रोचक जानकारी, सुविचार, जॉब, सरकारी नोकरी, कैरियर, कृषि, चुटकुले, भ्रमण स्थल की जानकारी, व्रत कथाएँ, रेसिपी, स्वास्थय, हैल्थ आदि सम्मिलित जानकारी का एक उचित स्थान है। Ghrelu upchar khan-pan sehat aayurvedic upchar Vart kathye mahapurusho ki jivni dharmik yatra hindu tirth Job in india rochak jankari all in one in hindi

व्रत त्यौहार :- हरियाली अमावस्या hariyali amavasya

हरियाली अमावस्या hariyali amavasya


अमावस्या amavasya

      अमावस्या का हिन्दू धर्म में अत्यधिक महत्वपूर्ण स्थान है। शास्त्रों के अनुसार इस तिथि के स्वामी
पितृदेव हैं। इसलिये अमावस्या के दिन पितरों को याद किया जाता हैं और इस दिन श्रद्धा भाव से उनका श्राद्ध भी करते हैं। अपने पितरों की शांति के लिए हवन आदि कराते हैं। ब्राह्मण को भोजन कराते हैं और साथ ही दान-दक्षिणा भी देते हैं।


हरियाली अमावस्या hariyali amavasya

        अमावस्या में श्रावण मास की अमावस्या को  हरियाली अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है।  यह त्योहर सावन में प्रकृति पर आई बहार की खुशी में मनाया जाता है। हरियाली अमावस पर पीपल के वृक्ष की पूजा की जाती हैं और परिक्रमा दी जाती है। इस दिन मालपूए का भोग बनाकर चढाये जाने की परम्परा है।

     हरियाली अमावस्या पर वृक्षारोपण का अधिक महत्व है। शास्त्रों में कहा गया है कि एक पे़ड दस पुत्रों के समान होता है। पे़ड लगाने के सुख बहुत होते है और पुण्य उससे भी अधिक होते हैं। वृक्ष सदा उपकार की खातिर जीते है। इसलिये हम वृक्षों के कृतज्ञ है। वृक्षों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने हेतु परिवार के प्रति व्यक्ति को हरियाली अमावस्या पर एक-एक पौधा रोपण करना चाहिये। पे़ड-पौधों का सानिध्य हमारे तनाव को तथा दैनिक उलझनों को कम करता है।

वृक्षों में देवताओं का वास- 

धार्मिक मान्यता अनुसार वृक्षों में देवताओं का वास बताया गया है। पीपल के वृक्ष में त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और शिव का वास होता है। इसी प्रकार आंवले के पे़ड में लक्ष्मीनारायण के विराजमान की परिकल्पना की गई है। इसके पीछे वृक्षों को संरक्षित रखने की भावना निहित है। पर्यावरण को शुद्ध बनाए रखने के लिए ही हरियाली अमावस्या के दिन वृक्षारोपण करने की प्रथा बनी। इस दिन कई शहरों व गांवों में हरियाली अमावस के मेलों का आयोजन किया जाता है। जिसमें सभी वर्ग के लोंगों के साथ युवा भी शामिल हो उत्सव व आनंद से पर्व मनाते हैं। गु़ड व गेहूं की धानि का प्रसाद दिया जाता है। स्त्री व पुरूष इस दिन गेहूं, ज्वार, चना व मक्का की सांकेतिक बुआई करते हैं जिससे कृषि उत्पादन की स्थिति क्या होगी का अनुमान लगाया जाता है। मध्यप्रदेश में मालवा व निम़ाड, राजस्थान के दक्षिण पश्चिम, गुजरात के पूर्वोत्तर क्षेत्रों, उत्तर प्रदेश के दक्षिण पश्चिमी इलाकों के साथ ही हरियाणा व पंजाब में हरियाली अमावस्या को पर्व के रूप में मनाया जाता है।

हरियाली अमावस्या का महत्व- hariyali amavasya ka mahtav -

हमारी धर्म संस्कृति में वृक्षों को देवता स्वरूप माना गया है। मनु-स्मृति के अनुसार वृक्ष योनि पूर्व जन्मों के कमों के फलस्वरूप मानी गयी है। परमात्मा द्वारा वृक्षों का सर्जन परोपकार एवं जनकल्याण के लिए किया गया है। पीपल- हिन्दू धर्म में पीपल के वृक्ष को बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है क्योंकि पीपल के वृक्ष में अनेकों देवताओं का वास माना गया है। पीपल के मूल भाग में जल, दूध चढाने से पितृ तृप्त होते है तथा शनि शान्ति के लिये भी शाम के समय सरसों के तेल का दिया लगाने का विधान है। केला- केला, विष्णु पूजन के लिये उत्तम माना गया है। गुरूवार को बृहस्पति पूजन में केला का पूजन अनिवार्य हैं। हल्दी या पीला चन्दन, चने की दाल, गु़ड से पूजा करने पर विद्यार्थियों को विद्या तथा कुँवारी कन्याओं को उत्तम वर की प्राप्ति होती है।

Popular Posts

Website Views