व्रत त्यौहार :- कजली तीज सातू तीज kajli teej
कजली तीज सातू तीज kajli teej / satu teej
तीज मुख्यत: स्त्रियों का त्योहार हैं। तीज त्यौहार की तरह इस तीज का भी अलग महत्त्व है| तीज एक ऐसा त्यौहार है जो शादीशुदा लोगों के लिए
बहुत महत्वपूर्ण होता है| हमारे देश में शादी का बंधन सबसे अटूट माना जाता है| पति पत्नी के रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए तीज का व्रत रखा जाता है| दूसरी तीज की तरह यह भी हर सुहागन के लिए महत्वपूर्ण है| इस दिन भी पत्नी अपने पति की लम्बी उम्र के लिए व्रत रखती है, व कुआरी लड़की अच्छा वर पाने के लिए यह व्रत रखती है| भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया को कजली तीज कहते हैं। इसे बड़ी तीज भी कहते हैं।
स्त्रियाँ अपने हाथों पर तीज त्योहार को ध्यान में रखते हुए भिन्न-भिन्न प्रकार की मेहंदी लगाती हैं। मेहंदी रचे हाथों से जब वह झूले की रस्सी पकड़ कर झूला झूलती हैं तो यह दृश्य बड़ा ही मनोहारी लगता हैं मानो सुहागिन आकाश को छूने चली हैं।
समस्त उत्तर भारत में तीज पर्व बड़े उत्साह और धूमधाम से मनाया जाता है। लोकगायन की एक प्रसिद्ध शैली भी इसी नाम से प्रसिद्ध हो गई है, जिसे 'कजली' कहते हैं। राजस्थान के लोगों के लिए त्योहार ही जीवन का सार है।
सातू तीज की कथा satu teej ki katha
किसान के 4 बेटे और बहुएं थी| उनमें से तीन बहुएं बहुत संपन्न परिवार से थी| लेकिन सबसे छोटी वाली गरीब थी और उसके मायके में कोई था भी नहीं | तीज का त्यौहार आया, और परंपरा के अनुसार तीनों बड़ी बहुओं के मायके से सत्तू आया लेकिन छोटी बहु के यहाँ से कुछ ना आया| तब वह इससे उदास हो गई और अपने पति के पास गई| पति ने उससे उदासी का कारण पुछा| उसने सब बताया और पति को सत्तू लेन के लिए कहा| उसका पति पूरा दिन भटकता रहा लेकिन उसे कहीं सफलता नहीं मिली| वह शाम को थक हार के घर आ गया| उसकी पत्नी को जब यह पता चला कि उसका पति कुछ ना लाया तब वह बहुत उदास हुई| अपनी पत्नी का उदास चेहरा देख वह रात भर सो ना सका|अगले दिन तीज थी जिस वजह से सत्तू लाना अभी जरुरी हो गया था| वह अपने बिस्तर से उठा और एक किरणे की दुकान में चोरी करने के इरादे से घुस गया| वहां वह चने की दाल लेकर उसे पीसने लागा, जिससे आवाज हुई और उस दुकान का मालिक उठ गया| उन्होंने उससे पुछा यहाँ क्या कर रहे हो? तब उसने अपनी पूरी गाथा उसे सुना दी| यह सुन बनिए का मन पलट गया और वह उससे कहने लगा कि तू अब घर जा, आज से तेरी पत्नी का मायका मेरा घर होगा| वह घर आकर सो गया|
अगले दिन सुबह सुबह ही बनिए ने अपने नौकर के हाथ 4 तरह के सत्तू, श्रृंगार व पूजा का सामान भेजा| यह देख छोटी बहुत खुश हो गई| उसकी सब जेठानी उससे पूछने लगी की उसे यह सब किसने भेजा| तब उसने उन्हें बताया की उसके धर्म पिता ने यह भिजवाया है| इस तरह भगवान ने उसकी सुनी और तीज प्रसन्न मन से मना सकी।
