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त्यौहार जयंती :-तुलसीदास जयंती Tulsidas jyanti

तुलसीदास जयंती  


सम्पूर्ण भारतवर्ष में महान ग्रंथ रामचतिमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास के स्मरण में तुलसी जयंती मनाई जाती है। श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी के दिन
तुलसीदासजी की जयंती मनाई जाती है।  गोस्वामी तुलसीदासजी ने कुल 12 पुस्तकों की रचना की है, लेकिन सबसे अधिक ख्याति उनके द्वारा रचित रामचरितमानस को मिली। दरअसल, इस महान ग्रंथ की रचना तुलसीदासजी ने अवधीभाषा में की है और यह भाषा उत्तर भारत के जन-साधारण की भाषा है। इसीलिए तुलसीदासजी को जन-जन का कवि माना जाता है।

तुलसीदासजी का जन्म 

      तुलसीदासजी का जन्म संवत 1589 को उत्तर प्रदेश (वर्तमान बाँदा ज़िला) के राजापुर नामक ग्राम में हुआ था। इनके पिता का नाम आत्माराम दुबे तथा माता का नाम हुलसी था। ऐसा कहा जाता है कि जन्म के समय तुलसीदास रोये नहीं थे और उनके मुख में पूरे बत्तीस दांत थे। लोगों का मानना है कि तुलसीदासजी संपूर्ण रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि के अवतार थे। उनके बचपन का नाम रामबोला था।

इनका विवाह दीनबंधु पाठक की पुत्री रत्नावली से हुआ था। तुलसीदासजी को अपनी सुंदर पत्नी रत्नावली से अत्यंत लगाव था। एक बार तुलसीदासजी ने अपनी पत्नी से मिलने के लिए उफनती नदी को भी पार कर लिया था। इस के कारण तुलसीदासजी को अपनी पत्नी रत्नावली से फटकार "लाज न आई आपको दौरे आएहु नाथ" सुननी पड़ी। उनकी पत्नी ने उन्हें उपदेश देते हुए कहा की - जितना प्रेम मेरे इस हाड-मांस के बने शरीर से कर रहे हो, उतना स्नेह यदि प्रभु राम से करते, तो तुम्हें मोक्ष की प्राप्ति हो जाती। पत्नी के उपदेश से तुलसीदासजी के मन में वैराग्य उत्पन्न हो गया और मन की चेतना जाग उठी । जिससे उनका जीवन ही परिवर्तित हो गया। वे उसी समय से प्रभु राम की वंदना में जुट गए।

 इनके गुरु बाबा नरहरिदास थे, जिन्होंने इन्हें दीक्षा दी।

 उन्होंने जन भाषा में 'श्री रामचरितमानस' की रचना करके उसमें समस्त आगम, निगम, पुराण, उपनिषद आदि ग्रंथों का सार भर दिया था। उन्होंने वैदिक हिन्दू सिद्धांतों को सदा के लिए अमर बना दिया था।


    अंग्रेज़ों ने हज़ारों भारतीयों को ग़ुलाम बना कर मॉरीशस और सूरीनाम आदि के निर्जन द्वीपों पर पटक दिया था तब उनके पास धर्म के नाम पर मात्र 'श्रीरामचरितमानस' की एक आध प्रति थी। केवल उसी के बल पर आज तक वहां (मॉरीशस और सूरीनाम में ) हिन्दू धर्म पूरे तेज के साथ स्थापित है। अनेकों ग्रंथों के रचियेता भगवान् श्री राम के परम भक्त गोस्वामी तुलसीदास जी भले ही तलवार लेकर लड़ने वाले योद्धा ना हों लेकिन उन्होंने अपनी भक्ति और लेखनी के बल पर हिन्दू धर्म की ध्वजा फहराए रखने में अपूर्व योगदान दिया था।


तुलसीदास जयंती के अवसर पर देशभर में रामचरितमानस के पाठ का आयोजन होता है। श्रद्धालु राम-सीता और हनुमान के मंदिर जाते हैं तथा तुलसीदासजी को स्मरण करते हैं।

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