रमा एकादशी
रमा एकादशी कब आती हैं ?
हिन्दू धर्म ग्रंथों के अनुसार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को रमा एकादशी कहा जाता है। जो दीपावली से चार दिन पहले आती है।
रमा एकादशी के दिन किसका पूजन किया जाता हैं ?
इस दिन भगवान विष्णु का विशेष विधि से पूजन किया जाता है। रमा एकादशी का व्रत देवी लक्ष्मी के ही अन्य नाम रमा के नाम से जाना जाता हैं।
रमा एकादशी के व्रत विधि क्या हैं ?
एकादशी व्रत के नियमों का पालन व्रत के एक दिन पहले दशमी के दिन से ही शुरू हो जाता है। रमा एकादशी के दिन स्नाना आदि से निवृत्त होकर व्रत संकल्प करना चाहिए। एकादशी व्रत के दिन भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए है। इसके बाद भगवान श्री हरि विष्णु की धूप, पंचामृत, तुलसी के पत्तों, दीप, नेवैद्ध, फूल, फल आदि से पूजा करनी होती है। रमा एकादशी व्रत की रात को भगवान विष्णु का जागरण और भजन- कीर्तन करना चाहिए। व्रत अगले दिन द्वादशी के दिन भगवान का पूजन कर ब्राह्मण को भोजन करवाना चाहिए और दान देना चाहिए। इसके बाद भोजन कर व्रत खोलना चाहिए।
रमा एकादशी व्रत का महत्त्व क्या हैं ?
पद्म पुराण के अनुसार रमा एकादशी व्रत कामधेनु और चिंतामणि के समान फल देता है। इस व्रत को करने से व्रती के अपने सभी पापों का नाश हो जाता हैं और वह भगवान विष्णु के धाम (मोक्ष) को प्राप्त करता है। उसे बार बार के जन्म मरण के चक्र से मुक्ति प्राप्त हो जाती है। इसके साथ रमा एकादशी व्रत के प्रभाव से धन- धान्य की कमी भी दूर हो जाती है।

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