हजारों वर्षों के लिए स्वर्ग में स्थान दिलाती है यह एकादशी, जानें कैसे ?
षटतिला एकादशी
▶ माघ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को षटतिला एकादशी कहते हैं।
▶ इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का विधान है।
▶ षटतिला एकादशी के व्रत में तिल का छ: रूप में दान और उपयोग करना उत्तम फलदाई माना गया है।
▶ यह मान्यता है कि जो व्यक्ति जितने रूपों में तिल का उपयोग तथा दान करता है वो उतने हजार वर्ष तक के लिये स्वर्ग में स्थान प्राप्त करता है।
षटतिला एकादशी के दिन 6 प्रकार से तिल का उपयोग और दान निम्न प्रकार से करें :-
संस्कृत में लिखा है :-
"तिलस्नायी तिलोद्वार्ती तिलहोमी तिलोद्की।
तिलभुक् तिलदाता च षट्तिला: पापनाशना:।।"
अर्थात- इस दिन तिलों के जल से स्नान, तिल का उबटन, तिल से हवन, तिल मिले जल को पीने, तिल का भोजन तथा तिल का दान करने (6 प्रकार से तिलों के प्रयोग) से समस्त पापों का नाश हो जाता है। धर्म शास्त्रों के अनुसार षटतिला एकादशी के दिन पद्मपुराण के एक अंश का श्रवण और ध्यान अवश्य करना चाहिए। इस दिन काले तिल, काली वस्तु और काली गाय दान करने का विशेष महत्व है।

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