महापुरुष :- पुरूषोत्तम दास टंडन
पुरूषोत्तम दास टंडन
पुरूषोत्तम दास टंडन भारत के स्वतन्त्रता सेनानी थे। हिन्दी को भारत की राजभाषा का स्थान दिलवाने के लिए उन्होंने महत्वपूर्ण
योगदान किया ताकि हिंदी को भारत की राष्ट्रभाषा के पद पर प्रतिष्ठित किया जा सके।
उनका जन्म उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में हुआ था। पुरुषोत्तम दास टंडन अत्यंत मेधावी और बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। वे भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन के अग्रणी पंक्ति के नेता थे। समर्पित राजनयिक, हिन्दी के अनन्य सेवक, कर्मठ पत्रकार, तेजस्वी वक्ता और समाज सुधारक भी थे। हिन्दी को भारत की राजभाषा का स्थान दिलवाने के लिए उन्होंने महत्वपूर्ण योगदान किया।
वर्ष 1905 में उन्होंने गोपाल कृष्ण गोखले के अंगरक्षक के रूप में कांग्रेस के अधिवेशन में भाग लिया। अगले वर्ष सन् 1906 में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रतिनिधि चुने गए। हिन्दी साहित्य सम्मेलन के पहले अधिवेशन में मालवीय जी की अध्यक्षता में टण्डन जी को सम्मेलन का प्रथम प्रधानमंत्री चुन लिया गया। सन् 1949 में भारतीय संविधान सभा की बैठक हुई, जिसमें टण्डन जी के प्रयासों के कारण संविधान सभा ने देवनागरी लिपि एवं हिन्दी को मान्यता प्रदान की । टण्डन जी के प्रयासों से ही केन्द्र सरकार ने हिन्दी साहित्य सम्मेलन को 'राष्ट्रीय महत्व की संस्था' घोषित किया।
1961 में उन्हें भारतवर्ष का सर्वोच्च राजकीय सम्मान भारत रत्न प्रदान किया गया।
