शरद ऋतु और सेहत
शरद ऋतु के माह - भाद्रपद माह और अश्विन माह को
शरद ऋतु के अंग्रेजी माह - अगस्त - सितम्बर
सितम्बर - अक्टूम्बर
प्रभाव - रोगों को जन्म देने वाली ऋतु होती हैं। इसलिये कहा गया हैं की रोगाणा शारदी माता।
हानिकारक प्रभाव - इस ऋतु में पित पर हानिकारक प्रभाव पड़ता हैं। पित यानि अग्नि जिससे पुरे शरीर पर प्रभाव पड़ता हैं।
शरीर पर प्रभाव - बुखार इस ऋत में ज्यादा होता हैं। जो सभी रोगों का स्वामी हैं।
खानपान -
1. दूध का प्रयोग करें।
2. गन्ने का प्रयोग अति उत्तम हैं।
3. गेंहू चावल आदि शीत भोज्य पदार्थ का उपयोग करें।
4. मुंग, आंवला, आदि का प्रयोग करें।
5. घी का प्रयोग कर सकते हैं।
6. पितनाशक भोज्य ग्रहण करें।
क्या न करें :-
1. दही का प्रयोग न करें।
2. तेल चर्बी का उपयोग न करें।
3. दिन में नींद न ले।
4. धुप एवम् सामने से आती हुई हवा से बचकर रहें।
5. पितवर्धक पदार्थ और गर्म पदार्थ का प्रयोग न करें।
शरद ऋतु के अंग्रेजी माह - अगस्त - सितम्बर
सितम्बर - अक्टूम्बर
प्रभाव - रोगों को जन्म देने वाली ऋतु होती हैं। इसलिये कहा गया हैं की रोगाणा शारदी माता।
हानिकारक प्रभाव - इस ऋतु में पित पर हानिकारक प्रभाव पड़ता हैं। पित यानि अग्नि जिससे पुरे शरीर पर प्रभाव पड़ता हैं।
शरीर पर प्रभाव - बुखार इस ऋत में ज्यादा होता हैं। जो सभी रोगों का स्वामी हैं।
खानपान -
1. दूध का प्रयोग करें।
2. गन्ने का प्रयोग अति उत्तम हैं।
3. गेंहू चावल आदि शीत भोज्य पदार्थ का उपयोग करें।
4. मुंग, आंवला, आदि का प्रयोग करें।
5. घी का प्रयोग कर सकते हैं।
6. पितनाशक भोज्य ग्रहण करें।
क्या न करें :-
1. दही का प्रयोग न करें।
2. तेल चर्बी का उपयोग न करें।
3. दिन में नींद न ले।
4. धुप एवम् सामने से आती हुई हवा से बचकर रहें।
5. पितवर्धक पदार्थ और गर्म पदार्थ का प्रयोग न करें।
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