शिक्षक दिवस Teacher's day
"गुरु ब्रह्मा, गुरुर्विष्णु गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात परब्रह्म तस्मैः श्री गुरुवेः नमः।"

गुरु-शिष्य परंपरा भारत की संस्कृति का एक अहम और पवित्र हिस्सा रही हैं। शिक्षक का समाज में सदैव आदरणीय व सम्माननीय स्थान रहा है। फिर भी विशेष दिवस के रूप में शिक्षक दिवस गुरुओं सम्मान के लिए शिष्यों द्वारा मनाया जाता है। इस दिन
प्रत्येक छात्र को अपने गुरु का मान-सम्मान करना और उनकी आज्ञा मानने का प्रण लेंना चाहिए। एकलव्य ने द्रोणाचार्य को अपना मानस गुरु मानकर उनकी प्रतिमा को अपने सक्षम रख धनुर्विद्या सीखी। यह उदाहरण प्रत्येक शिष्य के लिए प्रेरणादायक है।
आचार्य देवो भवः
गुरुकुल का विधान भारतीय संस्कृति की अनूठी विशेषता रही है जिसमें गुरु को देव के सम्मान पूजनीय माना गया हैं।
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